ग़ज़ल

Urdu poetry in hindi; Ghazal

Urdu poetry in hindi; Ghazal

दोस्तो, पेश है यहाँ मेरी चार ग़ज़लें । उम्मीद है

“Urdu poetry in hindi; Ghazal” आप सब को पसंद आएगी।

  1. Urdu poetry in hindi Ghazal
    Urdu poetry in hindi Ghazal

ये वादियाँ,ये चमन,औ सफेद झरने का
है लुत्फ़ ख़ूब तेरी ज़ीस्त में उतरने का.

ख़ुनुक फ़ज़़ा है बिछाओ तो लाॅन में चादर
ये वक़्त,धूप में हीं गुफ़्तगू है करने का.

मैं बार-बार हीं नाकामयाब होता हूँ
मगर हुआ न कभी तज़्रिबा बिखरने का.

ये सरगुज़श्त है दिल टूटने बिखरने की
सुने वही, है हुनर जिसमें आह भरने का

मैं मुंतजिर था चमन में कि अब खिलेंगे गुल
पयाम आया बहारों के पर मुकरने का.

उठा रही हैं सरें ताक़तें कुछ ऐसी आज
ऐ अहले हिन्द डरो वक़्त आया डरने का.

सरगुज़श्त… कहानी

मुंतजिर… प्रतीक्षारत 

ख़ुनुक… ठंढी 

Urdu poetry in hindi; Ghazal 2

अक्सर मुझे ख़ुशी तो हो !
आओ मिलो, ये भी तो हो !

वो गर नहीं तो कम से कम
जीने को ज़िन्दगी तो हो !

कैसे लड़ूँ ज़माने से
इक वज्ह इश्क़ की तो हो !

क्योंकर ख़फ़ा हुए हो तुम
सब दिन की तुम मेरी तो हो !

छोड़ो इधर-उधर की बात
अब बात यार की तो हो !

ये शाइरी कभी मेरी
बिल्कुल हाँ! आप सी तो हो !

नाराज़गी अब इश्क़ में
तुम से कभी-कभी तो हो !

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Urdu poetry in hindi; Ghazals 3

Urdu poetry in hindi Ghazal
Urdu poetry in hindi Ghazal

ये सख़्त लह्जे तुम्हें कर न दे सभी से परे
कभी कभार तो जज्बात में बहो गहरे.

ग़मे हयात ग़मे इश्क़ से है जो वाक़िफ़
ग़मे जहाँ से भला क्यों वो इसके बाद डरे

ये दर्दे इश्क़ जो चाहे तो कर ले जज्ब कोई
मगर ये आह कोई कैसे लब दबा के भरे.

जो बच गये थे फ़ना होने से कभी ए ‘नील’
कुछ ऐसे ख़्वाब हैं पलकों पे आज तक ठहरे.

ये ज़़िद हीं थी कि जियेंगे ए ज़िन्दगी तुझको
सो पोछ डाले जबीं पर से जो थे ग़म उभरे.

* तुम आज कल जो मिरे साथ उठते बैठते हो
ये ज़िन्दगी मेरी आने लगी असर में तेरे.

जबीं. .. ललाट

Urdu poetry in hindi; Ghazal 4

Urdu poetry in hindi Ghazal
Urdu poetry in hindi Ghazal

आबोगिल राह के पत्थर नहीं देखे जाते
राहे मंजिल में नौ मंजर नहीं देखे जाते.

शौके शुह्रत है तेरे दिल में तो इसमें जानो
पुरसुकूं नींद ये बिस्तर नहीं देखे जाते.

सांस लेतीं हैं ये दीवारें अभी तोड़ो मत
टूटते पुरखों के ये घर नहीं देखे जाते.

ऊब के आ हीं गया हद पे जहाँ की, देखो!
मुझसे दुनिया के ये तेवर नहीं देखे जाते.

ग़म ये उल्फ़त का है, मेरा है, मैं हीं देखूंगा
पूछूँ क्यों उनसे ये क्योंकर नहीं देखे जाते.

नक्हते मय से हीं मैं मस्त हुआ, मुझसे अब
कुछ भी मयखाने में दीगर नहीं देखे जाते.

देखना हो तो फ़क़त़ हौसले देखो ख़ुद में
चीज़ें ज़द में हैं कि बाहर नहीं देखे जाते.

आबोगिल… पानी मिट्टी 

नौ… नया

नक्हते मय… शराब की बू

 

 

By Su’neel 

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