तज़़मीन

तज़़मीन बर ग़ज़ल जाँ निसार अख़्तर

 जाँ निसार अख़्तर दोस्तो,  एक बार फिर पेश है तज़़मीन बर ग़ज़ल जाँ निसार अख़्तर । जां निसार अख़्तर एक ऐसे शाइर रहे हैं जिनकी कई पीढ़ियां शाइरी को ओढ़ती-बिछाती रहीं। एक लंबी फेहरिस्त रही है शाइरों की। जां निसार अख़्तर के बेटे जावेद अख़्तर और सलमान अख़्तर भी, तो पिता मुज़्तर खैराबादी भी एक मकबूल शाइर… Read More तज़़मीन बर ग़ज़ल जाँ निसार अख़्तर

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रघुपति सहाय (फ़िराक़ गोरखपुरी) की शाइरी और मेरी तज़मींन

फ़िराक़ गोरखपुरी ; एक परिचय प्रस्तुत है रघुपति सहाय (फ़िराक़ गोरखपुरी) की शाइरी और मेरी तज़मींन ; रघुपति सहाय उर्फ़ फ़िराक़ गोरखपुरी पिछली सदी के उर्दू ग़ज़ल के मक़्बूल शाइर रहे हैं। ये इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के लेेेक्चरर थे। इनका जन्म 28 August 1896 में और इन्तकाल 3 March 1982 में हुआ था। ये भी… Read More रघुपति सहाय (फ़िराक़ गोरखपुरी) की शाइरी और मेरी तज़मींन