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अनवर जलालपुरी की “उर्दू शाइरी में गीता”

अनवर जलालपुरी की “उर्दू शाइरी में गीता”

अनवर जलालपुरी के चंद रोज़ पहले इंतक़ाल की ख़बर ने पूरे अदबी जगत को ग़मगीन कर दिया । यकायक उनके अदबी सफ़र की तमाम उपलब्धियां और कारनामें नज़र के सामने कौंध ग‌ए। याद आ ग‌ई अनवर जलालपुरी की “उर्दू शाइरी में गीता” और क‌ई शेर

गुलों के बीच मानिंदे खा़र मैं भी था
फकीर ही था मगर शानदार में भी था “

अनवर जलालापुरी की "उर्दू शाइरी में गीता"
अनवर जलालपुरी

“कोई पूछेगा जिस दिन व़ाकई ये ज़िदगी क्या है
ज़मीं से एक मुट्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे”

 

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जी हां , शानदार शख़्सियत के मालिक थे अनवर जलालपुरी। लगभग 45 वर्ष से मुशायरों की निज़ामत करते आ रहे थे। नए और पुराने दौर के बड़े ही मक़बूल ओ मारूफ़ शायरों के मुशायरे में देश से लेकर विदेशों तक में इन्होंने निज़ामत की थी । चाहे फ़िराक़ गोरखपुरी हों अली सरदार जाफ़री , कैफ़ी आज़मी, मज़रूह, साहिर और अब के फ़रहत एहसास जैसे तमाम दिग्गज शाइर।

मंच पर इन की उपस्थिति मंच और श्रोताओं को सरशार कर देने की सलाहियत रखती थी। बरवक़्त शे’र को कोट करना, जुमले कहना और तुरंत जुमले गढ़ना, आवाज़ में जादू , लह़़्जे का हुस्न ये ऐसी ख़ासियतें रहीं जो मुशायरों को ऊंचा मेयार देतीं थीं। कोई भी बात आहिस्तगी और साफ़ तलफ़़्फ़ुज के साथ करना इनकी शख़्सियत का हिस्सा रहा।

अनवर जलालापुरी की "उर्दू शाइरी में गीता"
अनवर जलालपुरी

शुरुआती ज़िंदगी

अनवर जलालपुरी का जन्म 6 जुलाई 1947 को अंबेडकर नगर जिले के जलालपुर नामक कस्बे में हुआ था। इनके पिता हाफ़िज मोहम्मद हारुल ख़ुद उर्दू के जानकार और हाफि़ज ए क़ुरान थे। इन के घर पर तब के अदबी जगत के लोगों का आना जाना रहता था। मतलब घर में साहित्यिक माहौल था। इसी माहौल ने इन्हें मुतासिर भी किया।
इनकी शिक्षा जलालपुर में हुई। वहीं नरेंद्र देव इंटर कॉलेज से शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शिबली कॉलेज आजमगढ़ से BA किया । BA. में इनके तीन विषय अंग्रेजी ,उर्दू और अरबी लिटरेचर थे। तुलनात्मक अध्ययन का शौक था जो आगे चलकर भी उनकी कृतियों में दिखाई देता है। शायद यही कारण रहा था कि आगे चलकर उन्होंने गीता का अध्ययन किया और उसका उर्दू में तर्ज़ुमा किया। अनवर जलालपुरी की “उर्दू शाइरी में गीता” को स्वर देने का काम अनूप जलोटा ने किया है।

बहराल, 1968 ईस्वी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इन्होंने अंग्रेजी से MA किया। 1968 में एम ए करने के बाद ये नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के लेक्चरर बन गए जहां कभी ख़ुद भी ये पढ़े थे और तभी से नाजि़म की हैसियत से मुशायरों में इनकी शिरकत भी होने लगी ।

अनवर जलालापुरी की "उर्दू शाइरी में गीता"
अनवर जलालपुरी

कहते हैं कि 1976 में लखनऊ में एक मुशायरे का आयोजन हुआ था जिसमें देश के कई दिग्गज शाइर और राजनीति से बावस्ता लोग आए थे । उस मुशायरे की निज़ामत इतनी कामयाब रही कि यह यकायक ऑल इंडिया फेम एनाउंसर बन गये।
अनवर जलालपुरी के अदबी सफ़र और कामयाबियों पर अगर बात की जाए तो अदबी महकमे में इनकी शाख़ बलंद दिखाई देती है। इनकी लगभग 12 -13 किताबें छपीं जिसमें गीताांजली का तरजुमा और ख़ासतौर से ज़िक्र होता है गीता के उर्दू तरजुमा का । अनवर जलालपुरी की “उर्दू शाइरी में गीता” ने साहित्यिक दुनिया में उन्हें और रोशन किया।
खु़द अनवर जलालपुरी का मानना था कि यदि हम क़ुरान पढ़ते हैं तो अन्य दिगर धर्मों के पवित्र ग्रंथों को भी यकीनन पढ़ना चाहिए। ये समाजिक एकता और गंगा जमुनी तहज़ीब के बड़े पैरोकार रहे। इनकी इसी सोच ने शायद इस तरफ प्रेरित किया होगा जो गीता के 706 श्लोकों को एक हीं बह्र में 1761 अश्आर में पिरोने का काम किया । साथ ही गीतांजलि का उर्दू तरजुमा भी इन्होंने किया ,उमर खय्याम की भी तरजुमानी की। अनवर जलालपुरी की “उर्दू शाइरी में गीता” से  एक श्लोक के उर्दू अश्आर कुछ यूं हैं

धृतराष्ट्र आंखों से मरहूम थे
मगर ये न समझो कि मासूम थे

उन्हें भी थी ख़्वाहिश कि दुनिया है क्या
अंधेरा है क्या और उजाला है क्या

वह एक शख़्स संजय पड़ा जिसका नाम
वही उनसे आखिर हुआ हम क़लाम

उसे रब ने ऐसी नज़र बख़्श दी
कि बिन देखे हर एक शै देख ली

धृतराष्ट्र राजा भी थे बाप भी
समझते थे वह पुण्य भी पाप भी

मोहब्बत से बेटों के सरशार थे
अजब तरह के वह भी किरदार थे

उन्हें थी ये ख़्वाहिश की सब जान लें
सभी लड़ने वालों को पहचान लें

कहानी तो संजय सुनाता रहा
है मैदान में क्या बताता रहा

वह मैदां था जो जंग हीं के लिये
वहीं से जले धर्म के भी दिये I

उत्तर प्रदेश सरकार में मदरसा बोर्ड के चेयरमैन रहे ,”यश भारती” सम्मान से सम्मानित, टेलीविजन धारावाहिक’अकबर दी ग्रेट’ के संवाद लेखक, ‘डेढ़ इश़्किया’ फ़िल्म में मेहमान भूमिका निभाने वाले अनवर जलालपुरी अब नहीं रहे मगर उनकी लगभग 45 साल के मुशायरों के अंदाजे़ निजामत के किस्से और कृतियां हमारे बीच होंगीं। याद रहेंगी अनवर जलालापुरी की “उर्दू शाइरी में गीता”

आने वाली पीढ़ियां यकीनन उनसे सीखेंगीं और सरशार होंगीं। कहा जाता है कि जम्मू यूनिवर्सिटी और अवध यूनिवर्सिटी में अनवर जलालापुरी पर पीएचडी की जा रही है । हमारी दुआ है कि अल्लाह उन्हें जन्नत बख़्शे!

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